थोड़ी मिलावट थोड़ी रिशवत
चोरी उसपे सीना जोरी
और सारे नेताओ का भंगार
इन सब को मिलाकर बनता देश में भ्रष्टाचार
अफसर अफसर फाइल घुमाए
दस्थ्खत करके नोट कमाए!!!
बिन लिसेंसे की मेरी गाड़ी मेरी मर्ज़ी
पकडे गए तो पचास की पर्ची!!
ईमान टके के भाव है बिकता
देश टूटी नाव सा दिखता
हर शख्स यहाँ हैं जल्दी में
बिकने को तैयार खड़े सब मंडी में
क़र्ज़ में डूबता किसान जा रहा शमशान
भूक बीमारी से सारा देश हो रहा परेशान
कही फसले सड़ जाती हैं खेतो में
कही अखे नम हैं बंजर रेतो में
हमारे देश के भी देखो अलग अलग रंग रूप हैं
मिलती यहाँ रोटी महंगी
जूते दारु पर 50% छूट हैं
सच को यहाँ दबा दिया जाता हैं
सर चढ़ कर बोलता यहाँ सत्ताधारियो का झूट है
अनशन का दमन ,सरकारी लोकपाल
इसका जीता जगता सबूत हैं
आम आदमी का बनाकर अमरस
ईमानदारी की बनाकर पी जाते छाछ हैं
झूठ नाच रहा नंगा और सच पर आई आच हैं
उठो यारो मेरे देश के प्यारो
इस धरती का क़र्ज़ चुकाओ
बहुत हुई बेईमानी
अब भ्रश्टाचार को दूर भगाओ.